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बदलते मौसम, डाइट में ज्यादा खट्टी-ठंडी चीजों को खाने से टॉन्सिल की परेशानी बढ़ती है। यह समस्या छोटे बच्चों से लेकर 30-35 वर्ष की उम्र तक में भी होती है। बैक्टीरियल बीमारी में इम्युनिटी घटने से ऐसा होता है। सांस लेने में दिक्कत, मुंह खुला रहना, खर्राटे आते हैं। इससे कान की नसें दबने से सुनने की क्षमता घटती, ठीक से सांस न लेने पर हृदय पर भी दबाव पड़ता है। टॉन्सिल में ठंडी-खट्टी चीजें खाने से परेशानी बढ़ती, नमक के गरारे करें।
इनका रखें ध्यान: बार-बार सर्दी-जुकाम न होने दें। नमक के पानी से गरारे करें। सीने पर तिल के तेल से मालिश करें। रात में हल्दी दूध पीएं।
डॉक्टरी सलाह से लें ये दवाएं: होम्योपैथी में इलाज लक्षणों और मरीज की हिस्ट्री के आधार पर किया जाता है। बराटा कार्ब, कैल्किेरिया कार्ब, कैल्किेरिया आयोड, पार्टोलेका डी, आयोडम, कैल्किेरिया, सोरायनम, आदि दवाइयां हैं।
डॉ. कमलेंद्र त्यागी, वरिष्ठ होम्योपैथी विशेषज्ञ, जयपुर
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