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मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारी के लिए रामबाण हैऔषधिय पौधा 'जौ', इसके सेवन से होगें कई रोग दूर

नई दिल्ली। आज के समय में घर का हर क सदस्य किसी ना सी बीमारी से ग्रस्त है। जिसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है कि दिनचर्या में हो रहा लगातार बदलाव। लोगों के रहन-सहन से लेकर खान पान में भी काफी अंतर देखने को मिल रहा है। और यही परिवर्तन लोगों की बड़ी बीमारी का कारण बनते जा रहा है। हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घटती जा रही है। लेकिन क्या आप जानते है कि हमारे घर में कई चीजें ऐसी रखी होती है जिनके गुणों के बारे में आप ना जानने के कारण इसका उपयोग करना जरूरी नही समझते है। लेकिन ये औषधियां हमारे शरीर के लिए एक बड़ी संजीवनी बूटी की तरह काम करती है। उन्ही में से एक है जौ (Barley) इस प्राकृतिक औषधि का इस्तेमाल कई बड़ी बीमारियों का भी इलाज किया जा सकता है। जौ कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर है, जिनमें फॉस्फोरस, कैल्शियम, लैक्टिक एसिड अहम हैं। यह पेट के लिए काफी लाभदायक है। जौ का सेवन शरीर के लिए कई तरीकों से फायदेमंद है। इसका उपयोग करके प की तरह की खतरनाक बीमारियों से छुटकारा पा सकते है। आज से ही इसे अपनी डाइट में शामिल करें। 1. जौ के सत्तू में शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है। 2. जौ का ...

मेंटल हैल्थ: कोरोना में रिमोट वर्किंग, मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान है या अभिशाप?

चीन के वुहान शहर (Vuhan City, China) से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस महामारी (Covid-19) के चलते जीवन एक ठहराव पर आ गया है। कोविड-19 के प्रकोप (Corona Pandemic) ने हमारे व्यक्तिगत जीवन को बहुत प्रभावित किया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर हमारी नौकरियों और पेशेवर जीवन पर पड़ा है। कुछ राहत के बावजूद घनी आबादी वाले शहरों और कस्बों में बढ़ते कोरोना चार्ट को देखते हुए, लोग अब भी तनाव (Stress) में रहने को विवश हैं। लेकिन घर से काम कर रहे प्रोफेशनल्स इस समय जिन मनोवैज्ञानिक विकारों (Psychological Disorders) से गुजर रहे हैं, उन्हें इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 'घर से काम करना' इन दिनों तनावपूर्ण क्यों है? दरअसल, महामारी में होम सेटअप से घर के आरामदायक माहौल में काम करने का विकल्प (Work From Home) कहानी का सिर्फ एक पहलू है। इस तथाकथित 'वर्क फ्रॉम होम' लग्जरी के अलावा भी बहुत कुछ है। इसमें कोई शक नहीं कि घर से काम करने का विकल्प कर्मचारियों को हल्के-फुल्के परिचित माहौल में अपनी सुविधा के अनुसार काम करने का फ्लेक्सिबल शिड्यूल देता है। लेकिन, हा...

मेंटल हैल्थ: कोरोना में रिमोट वर्किंग, मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान है या अभिशाप?

चीन के वुहान शहर (Vuhan City, China) से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस महामारी (Covid-19) के चलते जीवन एक ठहराव पर आ गया है। कोविड-19 के प्रकोप (Corona Pandemic) ने हमारे व्यक्तिगत जीवन को बहुत प्रभावित किया है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर हमारी नौकरियों और पेशेवर जीवन पर पड़ा है। कुछ राहत के बावजूद घनी आबादी वाले शहरों और कस्बों में बढ़ते कोरोना चार्ट को देखते हुए, लोग अब भी तनाव (Stress) में रहने को विवश हैं। लेकिन घर से काम कर रहे प्रोफेशनल्स इस समय जिन मनोवैज्ञानिक विकारों (Psychological Disorders) से गुजर रहे हैं, उन्हें इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 'घर से काम करना' इन दिनों तनावपूर्ण क्यों है? दरअसल, महामारी में होम सेटअप से घर के आरामदायक माहौल में काम करने का विकल्प (Work From Home) कहानी का सिर्फ एक पहलू है। इस तथाकथित 'वर्क फ्रॉम होम' लग्जरी के अलावा भी बहुत कुछ है। इसमें कोई शक नहीं कि घर से काम करने का विकल्प कर्मचारियों को हल्के-फुल्के परिचित माहौल में अपनी सुविधा के अनुसार काम करने का फ्लेक्सिबल शिड्यूल देता है। लेकिन, हा...

तनाव: लॉकडाउन खत्म हुआ है बच्चों का स्ट्रेस नहीं, ऐसे कम करें उनका तनाव

बचपन हमारी जिंदगी का सबसे बेहतरीन समय होता है। लेकिन जैसे-जैसे मानव सभ्यता तेजी से आगे बढ़ रही है, तकनीक की चमक-दमक में मासूम बचपन की मीठी यादें भी हर गुजरते साल के साथ कम होती जा रही हैं। वहीं शुरुआती शैक्षणिक वर्षों में माता-पिता की अपेक्षाओं का बोझ भी बच्चों पर बोझ बन रहा है। आज सभी अभिभावक गलाकाट प्रतिस्पर्धा के दौर में चाहते हैं कि उनका बच्चा स्पोर्ट्स चैंपियन, क्लास-टॉपर या इनोवेटर बने। लेकिन इस चूहा दौड़ में बच्चों का मासूम बचपन घुल रहा है। रही-सही कसर कोविड-19 वायरस ने पूरी कर दी। पहले ही क्लास और असाइनमेंट्स के बीच पिसकर खुले में खेलने से वंचित इन बच्चों के पास अब प्राकृतिक वातावरण में हरियाली के बीच खेलने का अवसर भी सीमित हो गया है। इसका दुष्परिणाम यह है कि अब बच्चों के स्क्रीन टाइम में बड़ी तेजी से वृद्धि हो रही है। वे काम कर रहे हों या नहीं उन्हें बच्चों को अपना स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बच्चों को गैजेट्स देना अब माता-पिता के लिए खाना बनाने, ऑफिस का काम करने या कुछ देर शांति से रहने का एक आसान तरीका बन गया है। लेकिन क्या यह वास्तव में आप...

बढ़ती उम्र में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी हैं ये चीजें, देगें कई बड़ी समस्याओं से छुटकारा

नई दिल्ली। शरीर में पोषक तत्वों की कमी बढ़ती उम्र के साथ शुरू हो जाती है जिसकी ओर हम ध्यान नही देते है। जिसका नतीजा यह होता है कि हमारे शरीर में समय से पहले बुढ़ापा नजर आने लगता है और शरीर में कई तरह की समस्याएं भी पैदा होने लगती हैं। शरीर को सेहतमंद बनाए रखने में विटामिन्स का होना बेहद जरूरी होता है। खासतौर पर जब हमारी उम्र में तेजी से परिवर्तन हो रहा हो । आज हम यहां आपको बता रहे है कि ऐसे समय में किस तरह के विटामिन्स लेने चाहिए जो शरीर में हर कमी को दूर करने में आपकी मदद कर सकते है...आइए जानते हैं इनके बारे में। कैल्शियम- जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है बैसे बैसे हमारे शरीर में कैल्शियम की कमी का होना शुरू हो जाता है। और स कमी से शरीर में दर्द, होने के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं जिसकी वजह से ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। मेनोपॉज के बाद ये समस्या आम हो जाती है। 45 की उम्र पार कर लेने के बाद महिलाओं और 70 पुरुषों को कैल्शियम की अधिक मात्रा लेना शुरू कर देना चाहिए इसके लिए आप अपनी डाइट में दूध, दही और पनीर को शामिल करें। विटामिन B12- विटामिन B12 खून की कमी को पूरा करने के साथ कोशि...

सर्दी में सेहत बनाएंगे अश्वगंधा के गुणकारी लड्डू

आयुर्वेद में सर्दी और बीमारियों से बचाव के लिए कई तरह के पाक का वर्णन है। इसमें अश्वगंधा पाक, सौंठ (सुंठी) पाक, मेथी, हल्दी और अजवाइन पाक आदि शामिल हैं। इसी पाक को बर्फी या लड्डू के रूप में बनाकर खाने से सर्दी से जुड़े रोगों में लाभ मिलता है। अश्वगंधा लड्डू : बुद्धि व ताकत के लिए अश्वगंधा शरीर के तीन महत्वपूर्ण अंगों को मजबूती देता है। यह बुद्धि बढ़ाने के साथ मासंपेशियों, हड्डियों और नव्र्स को भी मजबूती देता है। यह इम्युनिटी बढ़ाने के साथ हृदय के लिए भी अच्छा है। कैसे बनाएं : एक किलोग्राम मूंग या गेंहू के आटे को अच्छे से घी में भून लें। फिर इसमें 100 ग्राम अश्वगंधा पाउडर, 50 ग्राम गोंद, 400 ग्राम गुड़ और 500 ग्राम घी के साथ कुछ सूखे मेवे डालकर लड्डू बना लेते हैं। इस लड्डू को कोई भी खा सकता है। कितनी मात्रा में खाएंं: इसको सुबह-शाम 50-50 ग्राम की मात्रा में खाएं। वयस्क 100-100 ग्राम की मात्रा में भी ले सकते हैं। सावधानियां- सर्दी के लड्डुओं की तासीर गरिष्ठ होती है। इन्हें खाने के बाद जब भूख लगे तो खाना खाएं, नहीं तो गुणवत्ता कम होगी। पाचन भी बिगड़ सकता है। साथ में खट्टी-ठंडी चीजें...

'करवाचौथ व्रत के लिए खास टिप्स' ऐसे रखें अपनी सेहत और डायट का ध्यान

करवा चौथ karwa chauth सुहागिन महिलाओं के लिए एक अहम व्रत है। कुछ महिलाएं इस व्रत में हल्का खाना-पीना कर लेती हैं लेकिन कुछ महिलाएं व्रत के दौरान पूरे दिन कुछ नहीं खातीं। व्रत करते समय खानपान का ध्यान रखेंगे तो शरीर को नुकसान नहीं होगा। अगर आप व्रत में कुछ खाएं तो तला-भुना, तेज मसालेदार न खाएं। इससे बुखार व अन्य समस्याएं हो सकती हैं। पूरा दिन खाली पेट है तो रात में हैवी खाने से कमजोरी, चक्कर, सिर दर्द की आशंका बढ़ जाती है। ऐसा रखें आहार- व्रत के भोजन में सेंधा नमक का इस्तेमाल करें । कुट्टू व सिंघाड़े का आटा शरीर के पाचन तंत्र को बढ़ाता और हाई बीपी में लाभदायक है। व्रत रखने से शरीर में एनर्जी का स्तर कम होता है। ऐसे में एनर्जी वाली तरल चीजों से पूरे दिन ऊर्जावान रह सकते हैं। नींबू पानी और दही की लस्सी का सेवन करें। एंटीऑक्सीडेंट युक्त नारियल पानी से बीपी नियंत्रित और अन्य बीमारियों में फायदा मिलता है। विटामिन्स, मिनरल्स, ग्लूकोज से भरपूर बनाना शेक इलेक्ट्रोलाइट संतुलन, बीपी नियंत्रण और हड्डियों के लिए फायदेमंद है। चुकंदर, सेब, पपीता, खीरा, अनार से दिनभर तारोताजा रहेंगे। व्रत खोलेने क...

कोरोनावायरस - भारत में घट रही है मौतों की संख्या, मृत्यु दर 1.49 प्रतिशत

नई दिल्ली । देश में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस के 38,310 नए मामले और 490 मौतें दर्ज हुईं है। इसके बाद कुल मामलों की संख्या 82,67,623 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 5,41,405 सक्रिय मामले हैं। कुल 76,03,121 मरीज ठीक हो चुके हैं और 1,23,097 लोग इस महामारी में अपनी जान गंवा चुके हैं। देश में रिकवरी दर 91.68 प्रतिशत और मृत्यु दर 1.49 प्रतिशत है। देश में सबसे ज्यादा प्रकोप झेल रहे राज्य महाराष्ट्र में कुल 16,87,784 मामले और 44,128 मौतें हो चुकी हैं। इसके बाद आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इस बीच राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को 4,001 नए मामले सामने आने के बाद कुल संख्या 3,96,371 हो गई। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने सोमवार को 10,46,247 सैंपल टेस्ट किए, इसके बाद परीक्षणों की कुल संख्या 11,17,89,350 हो गई है। दुनियाभर में मौतों की संख्या 12 लाख से ज्यादा हुई - जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के अनुसार दुनिया में कोरोनावायरस मामलों की कुल संख्या 4.68 करोड़ और मृ...

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वरदान है यह पौधा, कोरोना से भी दिलाएगा मुक्ति!

नई दिल्ली। हमारे हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व है लोग अपने घर पर इस पौधे को लगाना काफी अच्छा समझते है। इस पौधे को घर पर लगाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए है तुलसी के पौधे को घर पर लगाने से जहां पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है तो वहीं इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। तुलसी के पत्ते का सेवन करना (Basil Water) स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। तुलसी के फायदे (Benefits Of Basil) सिर्फ सर्दी-जुकाम तक ही नहीं बल्कि इस औषधीय पौधे के और भी कई स्वास्थ्य लाभ हैं। सुबह खाली पेट तुलसी के पानी (Basil Water Of Empty Stomch) का सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर के लिए तुलसी (High Blood Pressure) छीक होने के साथ ब्लड शुगर लेवल (Tulsi For Blood Sugar Level) कंट्रोल बना रहता है। इसके अलावा कई तरह से लाभकारी है तुलसी। 1. वजन घटाने में असरदार तुलसी के पानी का सेवन सुबह खाली पेट करने से शरीर का बढ़ता तेजी के साथ कम होता है। तेजी से वजन घटाने के लिए आप तुलसी के पानी का सेवन रोज कर सकते हैं। तुलसी का पानी आरके शरीर की ...

'इस मौसम में होने वाली 6 खतरनाक बीमारियों से ऐसे बचें'

इस बदलते मौसम में सबसे ज्यादा मच्छर जनित व अन्य वायरस के रोगों के मरीज सामने आते हैं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल फीवर, आई फ्लू, स्क्रब टाइफस के मरीज सामने आते हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए सावधानी रखना बहुत जरूरी है। आइये जानते हैं इनके बारे में । इन बीमारियों से बचें... 1. डेंगू Dengue डेंगू वायरस (एडीज मच्छर का संक्रमण ) के काटने से होता है। शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की कमी व त्वचा पर लाल चकत्ते इसके लक्षण हैं। कैसे बचें : साफ पानी को जमा होने व मच्छरों को पनपने से रोकें। मच्छरों के काटने से बचाव करें। 2. चिकनगुनिया Chikungunya ये 'आर्बोवायरस' से होता है। 104 डिग्री बुखार, शरीर पर लाल दाने हो सकते हैं। खाना बेस्वाद लगता है। कैसे बचें : सुबह-शाम के समय विशेष रूप से मच्छरों से बचें। लंबी आस्तीन की शर्ट व फुल पेंट पहनें। 3. मलेरिया Malaria मच्छर के काटने से होता है। तेज कंपकंपी के साथ बुखार आता है।, ठंड लगती है। कैसे बचें : पानी ढंककर रखें। पानी की सतह पर तेल डालें इससे मच्छर नहीं पनपेंगे। मच्छरदानी लगाएं। 4. वायरल Viral सर्दी- जुकाम में होने वाला बुखार है...

स्वस्थ रहने के लिए महिलाओं को लेने चाहिए ये पोषक तत्व, भूल से भी ना करें इन्हें इग्नोर

नई दिल्ली। भारत में यदि स्वास्थ को लेकर बात करे, तो सबसे ज्यादा बीमारी का बढ़ता आंकड़ा महिलाओँ में सबसे ज्यादा पाया गया है। यहां तक कि कोरोना (Corona) महामारी का सबसे ज्यादा प्रभाव भी महिलाओं, बच्चों और किशोरों पर पड़ा है। महिलाओं की सेहत पर हो रही लगातार गिरावट का सबसे बड़ा कारण तो पहले महिलाएं खुद होती हैं। क्योंकि वो लगातार घर के साथ ऑफिस का काम करने के दौरान अपने शरीर का ख्याल बिल्कुल भी नही करती है और लापरवाही बरतने लगती है और इनकी यही लापरवाही उनकी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित होती है। परिवार के सदस्यों के स्वस्थ रहने के साथ महिलाओं का स्वस्थ रहना भी काफी जरूरी है और इसके लिए उन्हें चाहिए की वो भरपूर मात्रा में पोषक तत्व का उपयोग अपने खान में करें। स्वस्थ जीवन जीने के लिए पौष्टिक आहार लेना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से, महिलाओं को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। क्योंकि महिलाओं के शरीर में शारीरिक परिवर्तन के साथ हार्मोन्स में भी काफी बदलाव होते है। और ऐसे में शरीर में होने वाली कमी को दूर करने के लिए पोषक तत्वों का सेवन करना आवश्यक है। सिर्फ प्रोटीन (protien), विटामिन (vi...

‘सर्दी में गुड़ खाने के 5 असरदार फायदे’ इन बीमारियों से दूर रहेगा शरीर

सर्दी के मौसम में गुड़ jaggery एक सुपर फूड है, इसके फायदों के बारे में लोगों को कम ही पता होता है। सर्दी के मौसम में गुड़ खाना विशेष लाभकारी होता है। गुड़ का नियमित सेवन करने से सर्दी के मौसम में होने वाले रोगों से बचा जा सकता है। गुड़ का पाचन जल्दी होता है। गुड़ में आयरन होता है इससे शरीर में खून की कमी नहीं होती। गुड़ के फायदे : रात में सोने से पहले गर्म पानी के साथ करें गुड़ का सेवन, इन जानलेवा बीमारियों का खतरा हो जाएगा कम 1- गुड़ खाने से पाचन में सुधार होता है जिससे भूख बढ़ाती है और सेहत में सुधार होता है। 2- यदि आपको गले में खराश है गला बैठ गया है तो गुड़ के साथ चावल को पकाकर खाएं इससे तुरंत फायदा मिलेगा। 3- अस्थमा और जुकाम में गुड़ का सेवन लाभ देता है। गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा की समस्या नहीं होती । अगर जुकाम जम गया हो तो गुड़ को पिघलाकर उसकी पपड़ी बना कर खाएं। इससे फायदा मिलेगा। 4- कान में दर्द रहता है तो इसके लिए गुड़ और देशी घी को मिला कर खाएं इससे कान दर्द में फायदा होगा। 5- यदि आपको पेट में गैस की समस्या हो तो खाने के बाद गुड़ का सेवन करें इस...

जापानी वैज्ञानिकों ने डीएनए-आधारित कोविड-19 वैक्सीन बनाई, अमरीका में होगा तीसरे चरण का ट्रायल

दुनियाभर में कोरोना वायरस कोविड-19 (corona virus covid-19) का टीका (covid-19 vaccine) बनाने की होड़ मची है लेकिन वायरस के 10 महीने की अवधि बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई कारगर वैक्सीन वैज्ञानिक जगत दुनिया को नहीं दे सके हैं। इस प्रयास में अब जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी (Osaka University, Japan) के वैज्ञानिकों ने भी अपना दावा पेश किया है। ओसाका विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में दो तरीकों स्यूडोवायरस ऐस्से और बाइंडिंग ऐस्से का इस्तेमाल किया है। हालांकि यह अध्ययन अब भी अपने प्रारंभिक चरण में है। 21 अक्टूबर को बायोरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्यययन में प्रकाशित वैज्ञानिक रिपोर्टों समीक्षा नहीं की गई है इसलिए ओसाका विश्वविद्यालय के अध्ययन को मान्यता प्राप्त डेटा के रूप में निर्णायक नहीं माना जा सकता है। कोविड-19 के विरुद्ध डीएनए से प्रेरित टीका जापानी शोधकर्ताओं ने एक डीएनए-आधारित वैक्सीन विकसित की है जो कोरोना वायरस कोविड-19 के ही परिवार के एक अन्य सदस्य सार्स-सीओवी-2 (SARS-COV-2) के स्पाइक पर मौजूद ग्लाइकोप्रोटीन को लक्षित करती है। सार्स वायरस इस प्रोटीन का उपयोग मानव कोशिकाओ...

मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप का करते हैं ज्यादा इस्तेमाल तो आंखों को हो सकता है नुकसान, जानें ये खास बातें

आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारे लिए जितने उपयोगी हैं उससे कहीं ज्यादा हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है, इन गैजेट्स का हद से ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत पर खराब असर डालता है। कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल स्क्रीन आदि पर ज्यादा समय तक नजरे टिकाए रखना आंखों के लिए हानिकारक damage eyes है। स्क्रीन वाले गैजेट्स का इस्तेमाल करते समय आंखों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइये जानते हैं इसके लिए कुछ खास टिप्स। तेजी से बढ़ रहे हैं 'डिजिटल विज़न सिंड्रोम' के केस, 10 में से 7 लोग इस समस्या से हैं परेशान, जानिए वजह इन खास बातों का रखें ध्यान- मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप चलाते समय आंखों को बीच-बीच में थोड़ा आराम देते रहे लगातार नजरें टिका का नजरें टिका कर न रखें। काम के दौरान हर घंटे आंखों को 3-5 मिनट के लिए आराम दें। कंप्यूटर, लैपटॉप पर काम करते समय करीब एक मीटर की दूरी रखें। स्क्रीन और आंखों के बीच डेढ़-दो फीट का फासला जरूर रखें। कंप्यूटर, लैपटॉप का स्क्रीन आई लेवल की ऊंचाई पर होना चाहिए। याद रखें ज्यादा गर्दन और कमर को झुकाकर काम ना करें। स्क्रीन पर काम करते समय आंखों को बीच-बीच में झपक...

महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में बन रहे कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी, जानें इस खास शोध के बारे में

महिलाओं की तुलना में औसत तौर पर पुरुष कोविड -19 एंटीबॉडी Covid antibodies का अधिक उत्पादन करते हैं। यह बात एक शोध में सामने आई है। शोध में कहा है कि, 90 फीसदी रोगियों में सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित होने के सात महीनों के बाद एंटीबॉडी मिली हैं। COVID-19 पर ICMR का नया खुलासा, एंटीबॉडी खत्म होते ही हो सकता है कोरोना वायरस से लड़ने मदद करती है एंटीबॉडी- यूरोपीय जर्नल ऑफ इम्यूनोलॉजी में एक शोध प्रकाशित हुआ है। शोध के नतीजे में यह बताया गया है कि एंटीबॉडी के स्तर के मामले में उम्र महत्वपूर्ण कारक नहीं है, लेकिन रोग की गंभीरता है। पुर्तगाल में मेडिसिना मॉलीक्यूलर आणविक जोआओ लोब एंट्यून्स के लेखक मार्क वल्डोवेन ने कहा, "मानव की प्रतिरक्षा प्रणाली सार्स-कोव-2 को हानिकारक वायरस के तौर पर पहचानती है और फिर इसके जवाब में एंटीबॉडी का उत्पादन करती है, जो वायरस से लड़ने में मदद करती है।" कोविड के माइल्ड मरीजों में एंटीबॉडी, गंभीर मरीजों से ज्यादा 300 से अधिक मरीजों पर हुआ शोध- इस अनुसंधान टीम ने कोविड -19 अस्पताल के 300 से अधिक रोगियों और स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ताओं के एंटीबॉडी स्...

क्या नमक के सेवन से जुड़ी ये खास बातें जानते हैं आप

नमक salt को भोजन के स्वाद का राजा कहा जाता है। भोजन में नमक सबसे महत्त्वपूर्ण घटक होता है। नमक शरीर के लिए जरूरी तत्व है। इसलिए हमें सेवन के लिए नमक का चयन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि कौन-सा नमक हमारी सेहत के लिए अच्छा और फायदेमंद है। सोडियम और क्लाराइड से प्रचुर नमक हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। आएये जानते हैं नमक के सेवन के से जुड़े कुछ खास तथ्यों के बारे में। ज्यादा नमक खाने के ये हैं नुकसान, एक दिन में कितना नमक खाना चाहिए आइए जानते हैं नमक के प्रकार- Types of salt सादा नमक। सेंधा नमक या रॉक सॉल्ट। समुद्री नमक । काला नमक। LATEST RESEARCH : ज्यादा नमक खाने से कमजोर होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता नमक के सेवन के जुड़ें कुछ खास तथ्य- हर प्रकार का नमक हमारी सेहत के लिए अलग-अलग तरह से फायदेमंद होता है। नमक की मात्रा, नमक को बनाने का तरीका, नमक का प्रकार ये सब हमारी सेहत के लिए महत्तवपूर्ण होते हैं। सादा नमक - इस नमक में सोडियम की मात्रा सबसे अधिक होती है। इस नमक के सेवन से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसका सेवन सीमीत मात्रा में करना चाहिए, ज्यादा सेवन से ह...

टॉन्सिल में ठंडी-खट्टी चीजें खाने से परेशानी बढ़ती, नमक के गरारे करें

बदलते मौसम, डाइट में ज्यादा खट्टी-ठंडी चीजों को खाने से टॉन्सिल की परेशानी बढ़ती है। यह समस्या छोटे बच्चों से लेकर 30-35 वर्ष की उम्र तक में भी होती है। बैक्टीरियल बीमारी में इम्युनिटी घटने से ऐसा होता है। सांस लेने में दिक्कत, मुंह खुला रहना, खर्राटे आते हैं। इससे कान की नसें दबने से सुनने की क्षमता घटती, ठीक से सांस न लेने पर हृदय पर भी दबाव पड़ता है। टॉन्सिल में ठंडी-खट्टी चीजें खाने से परेशानी बढ़ती, नमक के गरारे करें। इनका रखें ध्यान: बार-बार सर्दी-जुकाम न होने दें। नमक के पानी से गरारे करें। सीने पर तिल के तेल से मालिश करें। रात में हल्दी दूध पीएं। डॉक्टरी सलाह से लें ये दवाएं: होम्योपैथी में इलाज लक्षणों और मरीज की हिस्ट्री के आधार पर किया जाता है। बराटा कार्ब, कैल्किेरिया कार्ब, कैल्किेरिया आयोड, पार्टोलेका डी, आयोडम, कैल्किेरिया, सोरायनम, आदि दवाइयां हैं। डॉ. कमलेंद्र त्यागी, वरिष्ठ होम्योपैथी विशेषज्ञ, जयपुर from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/31wX6JB

Corona and flu: कोरोना, फ्लू और एलर्जी में अंतर को ऐसे समझें

बदलते मौसम में हमेशा की तरह इस बार भी वायरल संक्रमण हो रहा है लेकिन कोरोना के चलते लोगों में डर अधिक है। मौसमी फ्लू (वायरल), एलर्जी और कोरोना में अंतर न कर पाने से ज्यादा दवाइयां खा रहे हैं। वैसे तो कोरोना भी एक फ्लू है। इसके लक्षण भी वायरल जैसे ही होते हैं लेकिन कुछ अंतर भी हंै। जानते हैं इसके बारे में विस्तार से- कोरोना को ऐसे पहचाने शुरुआत: अचानक से लक्षण: हल्का बुखार बुखार 99-104 फारेनहाइट, सूखी खांसी शरीर में दर्द, सांस फूलना, थकान, कमजोरी कुछ लोगों में लक्षण: सिरदर्द, खांसी में खून आना, डायरिया आदि असर कब तक: सामान्यत: एक से 14 दिन से बढक़र 24 दिन तक भी हो सकता है गंभीरता: 05 फीसदी मामलों में निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत और मल्टी आर्गन फेल हो सकता है। रिकवरी: हल्के लक्षण हैं तो दो सप्ताह। कुछ में दो माह तक लग जाते हैं। इलाज: कोई वैक्सीन नहीं है। लक्षणों के आधार पर इलाज, पेन किलर न लें। अपने मन से दवा न खाएं। इम्युनिटी बढ़ाने का प्रयास करें। सीजनल फ्लू को ऐसे पहचाने शुरुआत: आकस्मिक लक्षण: बुखार 101-02 फेरनहाइट तक, बलगम वाली खांसी, जुकाम शरीर में दर्द, थकान, सिर दर्...

आयोडीन की कमी से हृदय के साथ दिमाग पर भी असर

दुनियाभर में करीब दो अरब लोग हैं, जो पर्याप्त मात्रा में आयोडीन अपनी डाइट में नहीं लेते हैं। इससे उनमें न केवल घेंघापन, हृदय रोगों का जोखिम बढ़ता है बल्कि दिमाग में मौजूद न्यूरॉन्स को भी नुकसान होता है। हर वर्ष 21 अक्टूबर को वल्र्ड आयोडीन डिफिशिएंसी डे मनाया जाता है। क्यों जरूरी है आयोडीन बच्चों में हड्डियों और दिमाग के विकास के लिए जरूरी है। थायरॉइड हार्मोन के विकास के लिए जरूरी है। यह मेटाबोलिज्म को नियंत्रित रखता है। विटामिन सी की तरह एंटीऑक्सीडेंट्स को एक्टिव कर इम्युनिटी बढ़ाता है। प्रजनन अंगों को मजबूती देता है। गर्भधारण आसान होगा। शरीर की लंबाई और वजन को भी नियंत्रित करता है। इनमें कमी की आशंका गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं में रेडिएशन या कैमिकल कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों में स्मोकिंग करने या अल्कोहल लेने वालों में अधिक गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं में कुछ खास बीमारियों में जो लोग आयोडीन वाला नमक नहीं खाते हैं उनमें कमी से दुष्प्रभाव थायरॉइड ग्रंथि में सूजन घेंघा रोग होना थकान और मांसपेशियों में दर्द वजन बढऩा, डिप्रेशन, एंजाइटी कब्ज...

न्यू रिसर्च: क्या हमें रोज नहाने की जरूरत होती है? डॉक्टर्स बोले रोज नहाना जरूरी नहीं

कोरोनोवायरस महामारी (corona pandemic) में अपना ज्यादातर समय घर बिताने से हमारी दैनिक दिनचर्या और आदतों में भी कुछ बदलाव हुए हैं। जैसे पहले रोज नहाकर स्कूल या ऑफिस जाने की हमारी में काफी बदलाव आया है क्योंकि अब रोज ऐसा करने की जरुरत नहीं पड़ती। वर्क फ्रॉम होम ने इसे और बढ़ावा दिया है। लेकिन क्या रोज न नहाना सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं है? डॉक्टर्स की एक टीम ने हाल ही अपने नए शोध में अक्सर पूछे जाने वाले इस सवाल का जवाब दिया है। रोज न नहाने से कोई नुकसान नहीं वर्क फ्रॉम होम और सोशल डिस्टेंसिंग के इस न्यू नॉर्मल में नहाने से परहेज तो किसी को नहीं है लेकिन बहुत से लोगों ने इसमें कमी की है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के वरिष्ठ संकाय संपादक डॉ. रॉबर्ट एच. शिर्लिंग के अनुसार रोजाना नहाना वास्तव में लाभ से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को इम्यून मेमोरी विकसित करने और उसके अनुसार संकेत मिलते ही अपनी पूरी क्षमता से काम करने के लिए कुछ सीमा तक वातावरण में गंदगी, सूक्ष्मजीवों और अन्य जोखिमों क...

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Health Benefits of Pear Fruit: नाशपाती को पोषक तत्वों का पावर हाउस माना जा सकता है. नाशपाती में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है. नाशपाती को डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. यह फल इम्यून सिस्टम, पाचन तंत्र और हार्ट को हेल्दी रखने में मददगार हो सकता है. आज आपको नाशपाती के 5 जबरदस्त फायदे बता रहे हैं. from हेल्थ & फिटनेस News in Hindi, हेल्थ & फिटनेस Latest News, हेल्थ & फिटनेस News https://ift.tt/6OeLBpS